भारतीय सेना(Indian Army)

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भारतीय सेना(Indian Army)

स्वतंत्रता प्राप्त होने के बाद भारतीय सेना में निम्न महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए |

1. ब्रिटिश ताज का स्थान अशोक जी ने ले लिया |
2. सुरक्षा सेनाओं का सर्वोच्च सेनापति भारत के राष्ट्रपति को बनाया गया |
3. तीनों सेनाओं के अलग-अलग सेनाध्यक्ष नियुक्त किए गए |
4. सेना में भर्ती होने के लिए किसी जाति, धर्म का बंधन समाप्त कर दिया गया |
5. कॉलेज/ स्कूल के छात्रों के लिए एन0सी0सी0 शुरू की गई |
आजादी के बाद भारतीय सेनाओं को निम्न युद्ध करने पड़े |

Following independence, the following important changes were made in the Indian Army.

1. Ashok ji replaced the British crown.
2. The President of India was made the supreme commander of the security forces.
3. Separate chiefs of three armies were appointed.
4. The bond of any caste, religion was abolished to join the army.
5. NCC has been started for college / school students.
After independence, Indian armies had to wage war.

कश्मीर अभियान 1947-48(Kashmir campaign 1947-48)

स्वतंत्रता के साथ है भारत की स्थल तथा वायु सेना को 1947-48 मैं कश्मीर में पाकिस्तान के विरुद्ध लड़ना पड़ा क्योंकि पाकिस्तान ने अपने दस्ते भेजकर कश्मीर को हड़पने के लिए हमला कर दिया था | यह पहला युद्ध जिसमें भारतीय अफसरों ने उच्च कमान संभाली तथा पहाड़ों व बर्फ में बड़ी-बड़ी सेनाओं को एकत्र करके उनका संचालन करने में चतुरता दिखाएं | शीघ्र पाकिस्तानी सेना को पीछे हटकर युद्ध विराम के लिए मजबूर होना पड़ा | इस युद्ध में मेजर सोमदत्त शर्मा को अपनी सुरवीरता के कारण मरणोपरांत “परमवीर चक्र” दिया गया |

India’s site and the Air Force had to fight against Pakistan in Kashmir in 1947-48 because Pakistan had sent its squad and attacked Kashmir to grab it. This was the first war in which Indian officers held high command and gathered smart armies in the mountains and snow to show them cleverness. Soon the Pakistani army was forced to retreat and to ceasefire. In this war, Major Somdutt Sharma was posthumously awarded the “Paramveer Chakra” due to his heroism.

चीनी आक्रमण 1962(Chinese invasion 1962)

अक्टूबर 1962 में पूर्वी तथा पश्चिमी दोनों ही क्षेत्र में चीन ने आक्रमण करके हमारे सैनिक दुर्बलता को संसार में विधित कर दिया | भारत इस आक्रमण के लिए तैयार नहीं था | से-ला के क्षेत्र में तो चीनियों ने हमारी सेना के पृष्ठ भाग में पहुंचकर आक्रमण करके चकित कर दिया | इस युद्ध में चीनी सैनिक इतनी विशाल संख्या में इस्तेमाल किए गए हैं थे कि आक्रमण जिसकी एक के बाद एक लहर आती थी, कभी समाप्त होता प्रतीत नहीं होता था | हमारे बहुत बड़े भू-भाग पर अधिकार कर के चीनियों ने 21-22 नवंबर को एक पक्ष में युद्ध विराम की घोषणा कर और उसके साथ साथ घटना आरंभ कर दिया |

In October 1962, China invaded both eastern and western regions, and made our military infirmity lawful in the world. India was not ready for this attack. In the area of ​​Se-La, the Chinese reached the back of our army and attacked and surprised them. Chinese soldiers were used in such a large number in this war that the attack which came one after the other, did not seem to end.By taking possession of our large land, the Chinese declared a ceasefire in one side on November 21-22 and started the incident simultaneously.
चीनी आक्रमण का सबक लेकर भारत ने अपनी सैनी संख्या में कई गुनी बढ़ोतरी की | कई पहाड़ी विज ने खड़ी की गई | कमांडो कोर्स खोले गए तथा नए प्रशिक्षण केंद्र खोले गए | नवीन सर्विस सिलेक्शन बोर्ड की स्थापना की गई |पूना तथा मद्रास में ऑफिसर प्रशिक्षण स्कूल खोले गए | वाइस चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ का पद बनाया गया तथा पैदल सेना को एस. एल. आर.(Self loading Rifle) दी गई |

With the lesson of the Chinese invasion, India increased its saini number several times. Many hills were erected by Vij. Commando courses were opened and new training centers opened. New Service Selection Board was established. Officer training schools were opened in Poona and Madras. The post of Vice Chief of the Army Staff was created and infantry was given to S.K. L. R (Self loading Rifle) given.

                                    कारगिल युद्ध

राष्ट्रीय राजमार्ग जम्मू – कश्मीर- ले कारगिल क्षेत्र से होकर गुजरता है | यहां नियंत्रण रेखा लगभग 5 किमी0 दूर है | सभी सेन चोटियों को साजो सामान पहुंचाने का यही एक रास्ता है | इस इलाके में जनसंख्या बहुत कम है, 12000-18000 फुट ऊंचे पहाड़ है जो 7-8 मैंने बर्फ से ढके रहते हैं | यहां से पाकिस्तानी अधिकृत सकालु कस्बा ज्यादा दूर नहीं है | यहां से गिलगिट को पक्की सड़क जाती है |

The National Highway passes through the Jammu-Kashmir-Le Kargil area. The Line of Control is about 5 km away. This is the only way to deliver logistic items to all the Sen peaks. The population in this area is very less, there are 12000-18000 feet high mountains which are covered by snow 7-8 I. Pakistani-occupied Sakalu town is not far from here. From here, the paved road goes to Gilgit.

इस लड़ाई की शुरुआत 8 मई 1999 ईस्वी से हुई जब हमारी सेना का एक गश्ती दल की लाइन ऑफ कंट्रोल की तरफ जाते हुए दुश्मन से मुठभेड़ हुई | इस युद्ध में पाकिस्तानी नार्दन लाइट इन्फेंट्री, स्पेशल सर्वेश ग्रुप में मुजाहिददी ने मिलकर धोखे से भारत के मास्कोहघाटी, द्रास, काकसूर, वाटर लेकर सब सेक्टर पर कब्जा जमा लिया |

The battle started on 8 May 1999, when a patrol of our army encountered the enemy while going towards the Line of Control. In this war, Mujahidadi together with the Pakistani Northern Light Infantry, Special Surveys Group, fraudulently captured the sub-sector of Maskohghati, Dras, Kaksoor and Water in India.

इनका प्रमुख उदेश राष्ट्रीय राजमार्ग को काट देना था जिसे भारत का सियाचिन व लेह छेत्र से संपर्क टूट जाए |इस क्षेत्र में दो पर्वत श्रृंखलाएं यानी देवमाई व हुंजा आकर मिलती है | इसे जकशाह श्रृंखला कहते हैं |Sakadu यहां आने का आसान मार्ग इसे के द्वारा है | घुसपैठिए लाहौर वार्ता का लाभ उठाते हुए भारतीय इलाके में घुस आए और उन्होंने टाइगरहिल, तोलोलीग, गन हिल इत्यादि पर कब्जा कर लिया | यहां से इन्होंने राजमार्ग अवरुद्ध करने के लिए भारतीय सेना के काफिले पर भीषण गोलाबारी की |

Their main purpose was to cut off the national highway, which breaks the contact with Siachen and Leh region of India. In this area, two mountain ranges ie Devmai and Hunja come together. This is called the Zakashah series. The easiest way to come here is through it. The intruders entered the Indian territory taking advantage of the Lahore talks and captured Tigerhill, Tololig, Gun Hill etc. From here they fired fiercely on the convoy of the Indian Army to block the highway.

विश्व के इस कठिन युद्ध को भारतीय सेना ठीक और वायु सेना ने मिलकर सफलता से लड़ा | भारतीय थल सेना ने सावधानीपूर्वक एक के बाद एक चौकी व चोटी पर कब्जा करना शुरू किया | यह युद्ध लगभग 20 जुलाई 1999 को समाप्त हुआ |इस युद्ध में दुश्मन के 1000 से अधिक सैनिक मारे गए | जबकि भारतीय सेना के 350 सैनिक ने अपने प्राणों को मातृभूमि की रक्षा के लिए बलिदान कर दिया |

The Indian Army and the Air Force jointly fought this difficult war of the world with success. The Indian Army carefully began occupying one outpost and peak after another. This war ended on July 20, 1999. In this war, more than 1000 enemy soldiers were killed. While 350 soldiers of the Indian Army sacrificed their lives to protect the motherland.

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